नक्षत्र क्या है
360 अंश के राशिचक्र को 27 नक्षत्रों में बाँटा गया है, और हर नक्षत्र 13°20′ का होता है। गिनती मेष के आरंभ में अश्विनी से शुरू होती है। हर नक्षत्र के चार चरण (पाद) होते हैं, हर चरण 3°20′ का। जन्म के क्षण चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, वही आपका जन्म नक्षत्र है।
हर नक्षत्र का एक स्वामी ग्रह होता है। नौ स्वामी एक तय क्रम में आते हैं — केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध — और यह क्रम राशिचक्र में तीन बार दोहराया जाता है। जन्म नक्षत्र का स्वामी ही आपकी विंशोत्तरी दशा की पहली दशा तय करता है।
इस गणना में क्या मिलता है
नक्षत्र और चरण के साथ आपको वे गुण भी मिलते हैं जो परंपरा इनसे जोड़ती है: गण (देव, मनुष्य या राक्षस), नाड़ी (आदि, मध्य या अंत्य), योनि (सहज प्रकृति का पशु-प्रतीक), वर्ण और वश्य। कुंडली मिलान में यही मान उपयोग होते हैं, इसलिए इन्हें जानने से गुण मिलान की तालिका समझना आसान हो जाता है।
नामाक्षर
हर चरण का एक पारंपरिक अक्षर होता है। जैसे अश्विनी के चार चरणों के अक्षर हैं चू, चे, चो और ला। कई परिवार बच्चे का नाम जन्म चरण के अक्षर से रखते हैं। यह एक प्रथा है; यह गणना बस आपके चरण का अक्षर बता देती है।
जन्म समय क्यों मायने रखता है
चंद्रमा कुंडली में सबसे तेज़ चलने वाला ग्रह है और लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार कर लेता है। अगर आपके जन्म के दिन चंद्रमा ने नक्षत्र बदला हो, या आपका जन्म किसी चरण की सीमा के पास हुआ हो, तो जन्म समय से ही तय होता है कि आपका नक्षत्र कौन सा है। समय पता न हो तो रिपोर्ट उस दिन चंद्रमा के सभी नक्षत्र दिखाती है। पूरा विवरण आपकी मुफ़्त जन्म कुंडली में है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या जन्म नक्षत्र और राशि एक ही हैं?
नहीं। राशि (चंद्र राशि) 30-30 अंश की 12 राशियों में से एक है; नक्षत्र 27 छोटे भागों में से एक। हर राशि में सवा दो नक्षत्र आते हैं।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
लाहिरी (चित्रापक्ष), जो भारत में मानक है, और ग्रहों की स्थिति स्विस एफ़ेमेरिस से ली जाती है।
क्या दो लोगों का एक ही नक्षत्र हो सकता है?
हाँ, अक्सर। चंद्रमा हर नक्षत्र में लगभग एक दिन रहता है, इसलिए उस दौरान जन्मे सभी लोगों का नक्षत्र एक होता है, भले ही चरण अलग हो।