जन्म कुंडली
पारंपरिक उत्तर भारतीय शैली में आपकी लग्न कुंडली (D1), हर ग्रह अपने भाव और राशि में।
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
कुंडली, ग्रह स्थिति, दशा, दोष, अष्टकवर्ग, केपी, पंचांग, उपाय और AI ज्योतिषी — मुफ़्त, बिना खाते के। हर गणना विधि खुलकर बताई गई है, ताकि आप देख सकें कि आपकी कुंडली कैसे बनती है।
सबसे सटीक कुंडली के लिए विवरण ठीक वैसे ही दें जैसे जन्म के समय दर्ज हुए थे।
सुझाव: जन्म प्रमाण पत्र या अस्पताल के रिकॉर्ड का समय सबसे भरोसेमंद है। पक्का नहीं पता? देखें जन्म समय सटीकता को कैसे प्रभावित करता है.
जन्म तिथि, समय और स्थान। आपके स्थान से अक्षांश-देशांतर और उस तिथि पर लागू समय क्षेत्र निकाला जाता है।
ग्रह स्थिति, लग्न, नक्षत्र और दशा की गणना नीचे ‘गणना विधि’ में बताए गए तरीकों से होती है।
पूरी रिपोर्ट खोलें, किसी भी आँकड़े को उदाहरण से मिलाएँ, और AI ज्योतिषी से प्रश्न पूछें।
जन्म पत्रिका
15 मई 1990, सुबह 6:30, नई दिल्ली
यह उसी गणना इंजन का वास्तविक परिणाम है जो आपकी कुंडली बनाएगा। नीचे के हर आँकड़े की व्याख्या ‘गणना विधि’ में है।
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र | भाव | स्थिति |
|---|---|---|---|---|---|
| सूर्य | वृषभ | 0°13′42″ | कृत्तिका 2 | 1 | — |
| चंद्र | धनु | 27°47′49″ | उत्तराषाढ़ा 1 | 8 | — |
| मंगल | कुंभ | 24°16′03″ | पूर्वा भाद्रपद 2 | 10 | — |
| बुध(व) | मेष | 14°20′58″ | भरणी 1 | 12 | — |
| गुरु | मिथुन | 15°43′45″ | आर्द्रा 3 | 2 | — |
| शुक्र | मीन | 18°34′11″ | रेवती 1 | 11 | उच्च |
| शनि(व) | मकर | 1°31′52″ | उत्तराषाढ़ा 2 | 9 | स्वराशि |
| राहु | मकर | 17°38′15″ | श्रवण 3 | 9 | — |
| केतु | कर्क | 17°38′15″ | आश्लेषा 1 | 3 | — |
लग्न वृषभ 15°20′29″ · रोहिणी 2 · वर्तमान दशा राहु–शुक्र · लाहिरी अयनांश 23.7225° · (व) = वक्री
ज्योतिष सूर्य, चंद्रमा, पाँच ग्रहों और दो चंद्र पातों को पढ़ता है। इनमें से सात के नाम पर सप्ताह के दिनों के नाम हैं।
कुंडली से लेकर जीवन के चरणों के समय और पारंपरिक उपायों तक — सब कुछ उन्हीं गणना की गई ग्रह स्थितियों से बनता है।
पारंपरिक उत्तर भारतीय शैली में आपकी लग्न कुंडली (D1), हर ग्रह अपने भाव और राशि में।
सभी नौ ग्रहों की राशि, सटीक अंश, नक्षत्र और चरण, भाव, वक्री स्थिति और बल (उच्च, स्वराशि आदि)।
आपके चंद्र नक्षत्र से 120 वर्ष की ग्रह दशा समय-रेखा: महादशा, अंतर्दशा और अभी चल रही अवधि।
मंगल, काल सर्प और अन्य शास्त्रीय दोषों की आपकी कुंडली से जाँच — फ़ैसले के रूप में नहीं, सरल भाषा में।
राशि और भाव अनुसार बिंदु — यह परखने का शास्त्रीय तरीका कि हर ग्रह कहाँ बलवान है और कहाँ दबाव में।
घटना-केंद्रित केपी पद्धति पसंद करने वालों के लिए कृष्णमूर्ति पद्धति के उप-स्वामी और कारक।
जन्म दिन के पाँच अंग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण, सूर्योदय और सूर्यास्त सहित।
आपकी कुंडली के ग्रहों से जुड़े पारंपरिक सुझाव — मंत्र, दान, व्रत के दिन और रत्न संबंधी विचार।
अपनी कुंडली के बारे में सरल भाषा में प्रश्न पूछें और अपनी वास्तविक ग्रह स्थिति पर आधारित उत्तर पाएँ।
छह चरण, उसी क्रम में जिसमें वे होते हैं। कुछ भी छिपा नहीं — उदाहरण की मदद से आप स्वयं गणना जाँच सकते हैं।
आपके जन्म स्थान से अक्षांश, देशांतर और आपकी जन्म तिथि पर वहाँ लागू नागरिक समय क्षेत्र निकाला जाता है।
आपका जन्म समय सार्वभौमिक समय में और फिर जूलियन दिवस में बदला जाता है — वह निरंतर समय-मान जिसे खगोलशास्त्री ग्रह गणना में उपयोग करते हैं।
सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और चंद्र पातों की स्थिति ग्रह पंचांग (एफ़ेमेरिस) से निकाली जाती है, फिर लाहिरी अयनांश घटाकर निरयण राशिचक्र में लाई जाती है। जब ग्रह की आभासी गति पश्चिम की ओर हो तो उसे वक्री माना जाता है। राहु और केतु हमेशा ठीक 180° की दूरी पर रहते हैं।
लग्न स्थानीय नाक्षत्र समय और आपके अक्षांश से निकाला जाता है। भाव पूर्ण राशि पद्धति से हैं: उदित राशि पहला भाव है और आगे की हर राशि अगला भाव।
राशिचक्र के 360° को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटा जाता है, और हर नक्षत्र 3°20′ के चार चरणों में। हर ग्रह की स्थिति इसी ग्रिड में तय होती है।
चंद्र नक्षत्र का स्वामी आपका दशा क्रम शुरू करता है। उस नक्षत्र का शेष भाग पहली दशा का शेष समय तय करता है, और बाकी दशाएँ 120 वर्ष के चक्र के निश्चित क्रम और अवधि में आती हैं, हर दशा अनुपात में अंतर्दशाओं में बँटी।
दशा क्रम और वर्ष: केतु 7, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19, बुध 17. कुल 120।
हर कुंडली के नीचे दो ग्रिड होते हैं: 30° की बारह राशियाँ और 13°20′ के सत्ताईस नक्षत्र। नमूना कुंडली की राशियाँ और नक्षत्र चिह्नित हैं।
हम जो भी पद्धति अपनाते हैं वह इसी पेज पर लिखी है, और उदाहरण की गणना हाथ से जाँची जा सकती है।
कुंडली, भाव और विंशोत्तरी दशा पाराशरी परंपरा के अनुसार हैं। केपी पद्धति उपयोग करने वालों के लिए अलग से दी गई है।
जन्म विवरण दें और तुरंत अपनी कुंडली पढ़ें। न साइन-अप, न कोई भुगतान।
ज्योतिष एक व्याख्यात्मक परंपरा है। हम इसे निष्ठा से प्रस्तुत करते हैं, आपके भविष्य की गारंटी के रूप में नहीं।
कुंडली का हर भाग जन्म के मिनट के प्रति बराबर संवेदनशील नहीं होता। यदि आपका समय अनुमानित है तो यह जानें।
| कुंडली का भाग | क्यों बदलता है | समय की गलती का असर | संवेदनशीलता |
|---|---|---|---|
| चंद्र राशि और नक्षत्र | चंद्रमा दिन में लगभग 13°, यानी घंटे में करीब 0.5° चलता है। | तभी बदलता है जब समय कई घंटे गलत हो, या चंद्रमा राशि की सीमा के पास हो। | कम |
| विंशोत्तरी दशा | नक्षत्र में चंद्रमा के सटीक अंश पर निर्भर करती है। | एक घंटे या अधिक की गलती से तिथियाँ कई सप्ताह खिसक सकती हैं। | मध्यम |
| लग्न | लगभग हर 2 घंटे में एक राशि उदित होती है, यानी करीब 4 मिनट में 1°। | कुंडली का सबसे अधिक समय-संवेदी भाग। | अधिक |
| वर्ग कुंडलियाँ | लग्न का नवांश (D9) लगभग हर 13 मिनट में बदलता है। | सार्थक होने के लिए सटीक जन्म समय चाहिए। | बहुत अधिक |
जन्म समय के सबसे अच्छे स्रोत: जन्म प्रमाण पत्र या अस्पताल का रिकॉर्ड, फिर उस समय की पारिवारिक डायरी या बनी हुई कुंडली। ऊपर के समय औसत हैं और राशि तथा आपके अक्षांश के साथ बदलते हैं।
कुंडली कैसे बनती है और उसे कैसे पढ़ें — सीधे उत्तर।
जन्म कुंडली आपके जन्म के सटीक क्षण और स्थान पर आकाश का नक्शा है। इसमें सूर्य, चंद्र, ग्रहों और चंद्र पातों की राशि, भाव और नक्षत्र, तथा लग्न दर्ज होते हैं। वैदिक ज्योतिषी इससे स्वभाव, शक्तियाँ, जीवन के विषय और समय को समझते हैं।
हाँ। कुंडली बनाना मुफ़्त है और इसके लिए किसी खाते या साइन-अप की ज़रूरत नहीं। जन्म तिथि, समय और स्थान दें, और रिपोर्ट तुरंत खुल जाएगी।
मुख्य कुंडली में भारत का मानक लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश और पारंपरिक पाराशरी पूर्ण राशि भाव पद्धति उपयोग होती है। आपकी जन्म तिथि के लिए उपयोग हुआ अयनांश मान रिपोर्ट में दिखाया जाता है, ताकि आप उसे जाँच सकें।
लग्न जन्म के क्षण पूर्वी क्षितिज पर उदित राशि है, और वही भाव तय करता है। राशि का अर्थ प्रायः चंद्र राशि होता है। नक्षत्र चंद्रमा का नक्षत्र है — राशिचक्र के 27 भागों में से एक — और यही आपके दशा क्रम का आरंभ बिंदु तय करता है।
वैदिक ज्योतिष निरयण राशिचक्र उपयोग करता है, जो स्थिर तारों से जुड़ा है। पश्चिमी ज्योतिष सायन राशिचक्र उपयोग करता है, जो ऋतुओं से जुड़ा है। दोनों में अयनांश (अभी लगभग 24°) का अंतर है, इसलिए कई लोगों के ग्रह ज्योतिष में एक राशि पहले आते हैं। वैदिक कुंडली में चंद्र राशि को भी सूर्य राशि जितना महत्व दिया जाता है।
हाँ, पर सावधानी से। ग्रहों की राशि, आपकी चंद्र राशि और नक्षत्र प्रायः कुछ घंटों तक नहीं बदलते। लग्न, भाव और वर्ग कुंडलियाँ सटीक समय पर निर्भर करती हैं। हो सके तो जन्म प्रमाण पत्र या अस्पताल का रिकॉर्ड देखें या परिवार से पूछें, और सबसे सटीक समय का उपयोग करें।
यह ज्योतिष की सबसे प्रचलित समय-पद्धति है — ग्रह दशाओं का 120 वर्ष का चक्र। आपका क्रम आपके चंद्र नक्षत्र के स्वामी ग्रह से शुरू होता है। हर महादशा अंतर्दशाओं में बँटी होती है, और किसी समय चल रहा ग्रह उस अवधि के विषयों को प्रभावित करता माना जाता है।
नहीं। दोष — जैसे मंगल या काल सर्प — कुंडली का एक शास्त्रीय योग है जिसे पारंपरिक ग्रंथ कुछ चुनौतियों से जोड़ते हैं। इसका प्रभाव कुंडली के कई अन्य कारकों पर निर्भर करता है, और इसके कई शास्त्रीय भंग भी हैं। इसे समझने और चर्चा करने की बात मानें, फ़ैसला नहीं।
ज्योतिष सदियों पुरानी व्याख्यात्मक परंपरा है और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है। अपनी कुंडली का उपयोग चिंतन और सांस्कृतिक या व्यक्तिगत रुचि के लिए करें। यह चिकित्सा, कानूनी, वित्तीय या मनोवैज्ञानिक पेशेवर सलाह का विकल्प नहीं है।
॥ शुभम् अस्तु ॥
अपना लग्न, ग्रह, दशा और बहुत कुछ देखने के लिए जन्म तिथि, समय और स्थान दें। मुफ़्त, बिना खाते के।
ज्योतिष एक पारंपरिक व्याख्यात्मक पद्धति है और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है। यहाँ की सामग्री चिंतन और सांस्कृतिक रुचि के लिए है, और चिकित्सा, कानूनी, वित्तीय या मनोवैज्ञानिक पेशेवर सलाह का विकल्प नहीं है।